छत्तीसगढ़ में प्रीमियम चावल 25 रुपये तक महंगा, मिलों में धान की कमी से बिगड़ी आपूर्ति

छत्तीसगढ़ के बाजारों में सुगंधित और उम्दा किस्मों वाले चावल की खुदरा कीमतों में पिछले एक माह के दौरान 10 रुपये से 25 रुपये प्रति किलोग्राम तक का उछाल आया है। त्योहारी मौसम के बीच खपत तेज होने और प्रसंस्करण इकाइयों में पुराने धान का स्टॉक करीब-करीब रीत जाने से यह तेजी देखने को मिली है। खुदरा मंडियों में आवक घटने के चलते प्रीमियम श्रेणियों के दाम लगातार चढ़ रहे हैं।
कीमतों के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में 50 से 60 रुपये प्रति किलो बिकने वाले एचएमटी चावल का भाव 19 अक्टूबर को बढ़कर 65 से 70 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। जीरा राइस के दाम 80-85 रुपये से छलांग लगाकर 100 से 110 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गए हैं। इसके अलावा काली मूंछ 58-68 रुपये से बढ़कर 70-78 रुपये, श्रीराम 65-75 रुपये से 75-88 रुपये, अब्बा हुजूर 75-76 रुपये से 90-95 रुपये और जवा फूल 115-120 रुपये से तेज होकर 125-140 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बिक रहा है।
इस मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण राज्य के भीतर बारीक और खुशबूदार धान के रकबे में आई गिरावट है। शासन की ओर से धान पर 3100 रुपये प्रति क्विंटल का उपार्जन मूल्य दिया जा रहा है। मोटे धान में बेहतर पैदावार और निश्चित सरकारी खरीद की सुविधा मिलने से काश्तकार भारी मात्रा में मोटी किस्मों की बुआई को तरजीह दे रहे हैं। इसके प्रभाव से श्रीराम, काली मूंछ, एचएमटी और जीरा राइस जैसे विशिष्ट धान की पैदावार घट गई है। पिछले खरीफ सत्र की उपज स्थानीय स्तर पर और किसानों के पास अब नाममात्र ही बची है।
सीमावर्ती राज्यों जैसे मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा में भी पुराना माल काफी सीमित रह गया है। केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य सामान्य धान के लिए 2,369 रुपये और ग्रेड-ए हेतु 2,389 रुपये प्रति क्विंटल है। इसके विपरीत मध्यप्रदेश के खुले कारोबार में धान 2,400 से 3,100 रुपये और खुशबूदार किस्में 4,600 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही हैं, जिससे बाहर से अनाज मंगाना खर्चीला साबित हो रहा है।
छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कांतिलाल बोथरा के अनुसार मिलों में कच्चा माल खत्म होने से चावल तैयार करने पर सीधा असर पड़ा है और नया धान आने तक यह रुकावट जारी रह सकती है। वहीं फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया राइस मिलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि दीपावली तक उपभोक्ता मांग अधिक रहने के चलते कीमतें ऊंची हैं और नवंबर माह के अंत के बाद ही कुछ राहत मिलने के आसार हैं। आगामी खरीफ सीजन हेतु सरकारी खरीद 14-15 नवंबर के आसपास शुरू होने का अनुमान है।