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छत्तीसगढ़ में मानदेय और बॉन्ड नीति के विरोध में कनिष्ठ चिकित्सकों की हड़ताल, सरकारी अस्पतालों में सेवाएँ प्रभावित

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Ranjithsiji / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)

छत्तीसगढ़ के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत और सेवारत लगभग तीन हजार कनिष्ठ चिकित्सकों ने मानदेय वृद्धि तथा अनिवार्य सेवा बॉन्ड की शर्तों के विरोध में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार आरंभ किया है। प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान रायपुर स्थित अंबेडकर अस्पताल के बाहर चिकित्सकों ने एकत्र होकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की।

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन के कारण मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में ओपीडी, नियमित जाँच और आपातकालीन सेवाओं का संचालन प्रभावित हुआ है। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, जब तक उनकी माँगें स्वीकार नहीं की जातीं, तब तक वे किसी भी मरीज की जाँच या उपचार कार्य में भाग नहीं लेंगे। इस हड़ताल में पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) छात्र, इंटर्न और बॉन्ड आधारित चिकित्सक शामिल हैं।

एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ प्रेम चौधरी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में कनिष्ठ चिकित्सकों को प्रतिमाह पचास से पचपन हजार रुपये की शिष्यवृत्ति दी जाती है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों में यह राशि लगभग नब्बे हजार रुपये तक है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश में पिछले चार वर्षों के दौरान मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई है। चिकित्सकों ने राज्य में लागू चार वर्ष के अनिवार्य सेवा बॉन्ड को भी अत्यधिक बताते हुए इसे कम करने की मांग रखी है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने चिकित्सकों की इन मांगों को सैद्धांतिक समर्थन दिया है। संगठन के अध्यक्ष डॉ राकेश गुप्ता ने हड़ताल स्थल का दौरा कर चिकित्सकों के रुख को जायज बताया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से दूरभाष पर चर्चा कर शिष्यवृत्ति में संशोधन करने, बॉन्ड की शर्तों की समीक्षा करने और आयुष्मान योजना से जुड़े भुगतान के मसलों पर त्वरित पहल करने का आग्रह किया है।

सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में मरीजों की प्राथमिक देखभाल का दायित्व मुख्य रूप से कनिष्ठ चिकित्सकों पर निर्भर होने के कारण जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में आने वाले नागरिकों को उपचार के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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