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छत्तीसगढ़ में मानदेय वृद्धि और चार वर्षीय बॉन्ड के विरोध में तीन हजार जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Raunak005 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत और सेवारत करीब तीन हजार जूनियर डॉक्टरों ने शिष्यवृत्ति में बढ़ोतरी और चार वर्ष के अनिवार्य बॉन्ड के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। राजधानी रायपुर स्थित डॉक्टर भीमराव अंबेडकर अस्पताल के बाहर डॉक्टरों ने धरना देकर नारेबाजी की। इस आंदोलन के चलते प्रदेश भर के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में नियमित ओपीडी, जांच और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं से जूनियर डॉक्टरों ने स्वयं को पूरी तरह अलग कर लिया है।

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जांच और उपचार की मुख्य जिम्मेदारी जूनियर डॉक्टरों पर होने के कारण ओपीडी और आपातकालीन विभागों में आने वाले मरीजों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में शुरू हुए इस कार्य बहिष्कार में सभी परास्नातक (पीजी) छात्र, इंटर्न और बॉन्ड पर पदस्थ चिकित्सक शामिल हैं। एसोसिएशन के प्रमुख डॉ प्रेम चौधरी ने कहा कि जब तक मांगों का निराकरण नहीं होता, तब तक चिकित्सक किसी भी मरीज की जांच नहीं करेंगे।

डॉ प्रेम चौधरी के अनुसार राज्य में जूनियर डॉक्टरों को मिलने वाला मानदेय पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश और झारखंड की तुलना में बेहद कम है। अन्य प्रदेशों में शिष्यवृत्ति नब्बे हजार रुपये तक दी जा रही है, जबकि छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों को सिर्फ पचास से पचपन हजार रुपये मिलते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों के दौरान मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई है। इसके अलावा देश के किसी अन्य राज्य में चार वर्ष का बॉन्ड लागू नहीं है, यह व्यवस्था केवल छत्तीसगढ़ में ही चल रही है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने भी जूनियर डॉक्टरों के इस कदम को जायज ठहराते हुए अपना समर्थन दिया है। आईएमए के अध्यक्ष डॉ राकेश गुप्ता ने धरना स्थल पर पहुंचकर चिकित्सकों की मांगों को सैद्धांतिक सहमति दी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले में त्वरित निर्णय लेने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने शिष्यवृत्ति पुनरीक्षण और अन्य मांगों पर पहल करने के लिए शासन स्तर पर चर्चा भी की है।

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