छत्तीसगढ़ में वन अधिकार और पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु टास्क फोर्स की बैठक संपन्न

छत्तीसगढ़ में वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के सुदृढ़ क्रियान्वयन के उद्देश्य से गठित विशेष टास्क फोर्स की पहली बैठक आयोजित की गई। जनसंपर्क विभाग के अनुसार, इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की। बैठक का मुख्य लक्ष्य अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के विधिक अधिकारों को मजबूती प्रदान करना और दोनों महत्वपूर्ण कानूनों के समन्वय से प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय करना है।
जनसंपर्क विभाग के अनुसार, शासन वनों के भीतर निवासरत पारंपरिक समुदायों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए लगातार प्रयासरत है। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने रेखांकित किया कि वन अधिकार अधिनियम के माध्यम से वनवासियों के जीवन में व्यापक सुधार लाना शासन की मुख्य जिम्मेदारी है। इसके अलावा, रायपुर में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार हासिल कर चुकी ग्राम सभाओं के आजीविका संवर्धन तथा क्षमता विकास हेतु दो दिवसीय विशेष कार्यशाला भी आयोजित की गई।
प्रशासनिक स्तर पर वन विभाग ने दावा किया है कि राज्य में वनाधिकार नियमों का क्रियान्वयन पारदर्शी, वैज्ञानिक और समुदाय केंद्रित दृष्टिकोण के साथ किया जा रहा है। हालांकि, धरातल पर नियमों के उल्लंघन और पट्टा भूमि के अवैध सौदों के मामले भी सामने आए हैं। सरगुजा क्षेत्र में महामाया पहाड़ से लगे खैरबार और बधियाचुआं में वन अधिकार पत्र के जरिए प्राप्त जमीन को स्टाम्प पेपर पर गैर-कानूनी ढंग से बेचने का मामला उजागर हुआ है।
जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ने सात पट्टाधारकों के आवंटन निरस्त कर दिए हैं। वन विभाग ने हरमुनिया, सुधीर राज चौहान, मेरी फीलिसीता, बालरुप, कल्याण कुजूर, रायल्लो बाई और बसंती को बेदखली का नोटिस थमाकर भूमि खाली करने का आदेश दिया है।
सरगुजा के संभागीय वन अधिकारी पंकज कमल के अनुसार, अवैध रूप से जमीन बेचने की शिकायत सही मिलने पर यह सख्त कदम उठाया गया है। जांच दल की रिपोर्ट में खैरबार, बधियाचुआं और डबरी पानी क्षेत्र में कुल 468 अतिक्रमण भी चिन्हित किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि पात्र वनवासियों के अधिकारों के संरक्षण के साथ-साथ नियमों के उल्लंघन पर निरंतर वैधानिक निगरानी रखी जाएगी।