शासन-प्रशासनरायपुर

छत्तीसगढ़: वर्ष 2021 में शुरू हुई मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना, धान छोड़कर पेड़ लगाने पर प्रति एकड़ 10,000 रुपये का प्रावधान

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: etvbharat.com

छत्तीसगढ़ में तत्कालीन राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और काश्तकारों की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना’ लागू की थी। राजधानी रायपुर में आयोजित एक डिजिटल समारोह के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इस पहल को शासन की पूर्ववर्ती राजीव गांधी किसान न्याय योजना के साथ जोड़ा गया था, ताकि पारंपरिक धान उत्पादक किसान व्यावसायिक और फलदार वानिकी की ओर आकर्षित हो सकें।

आधिकारिक दिशानिर्देशों के अनुसार, जिन कृषकों ने वर्ष 2020 के खरीफ सत्र के दौरान धान की खेती की थी, उन्हें आगामी फसलों के स्थान पर खेत में पेड़ लगाने पर लाभ देने की व्यवस्था की गई। ऐसे किसानों को आगामी तीन वर्षों तक 10,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से वार्षिक प्रोत्साहन राशि दी जानी तय की गई थी। इसके साथ ही, पंचायतों और संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को भी इस दायरे में शामिल किया गया था। यदि ग्राम पंचायतें अपने उपलब्ध बजट से पौधे लगाती हैं, तो एक साल पूरा होने पर उन्हें 10,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान राशि देने का नियम बनाया गया था। इसी तर्ज पर राजस्व भूमि पर व्यावसायिक वृक्षारोपण करने वाली समितियों को भी यही वित्तीय लाभ देने का प्रावधान था।

प्रशासनिक नियमों के तहत किसानों को निजी जमीन पर लगाए गए पेड़ों को काटने के लिए किसी सरकारी महकमे से अनुमति लेने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई। व्यावसायिक उपयोग के लिए पेड़ लगाने वाली वन प्रबंधन समितियों को भी वृक्षों की कटाई और उनकी बिक्री का पूरा अधिकार दिया गया। इससे काश्तकारों को विभागीय जटिलताओं से मुक्ति मिलने की बात कही गई थी।

योजना के क्रियान्वयन के लिए वन विभाग ने 99 लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था, जबकि जनता के बीच करीब 2 करोड़ 27 लाख पौधे वितरित करने की तैयारी की गई थी। सरकारी वक्तव्य के मुताबिक, फलदार वृक्षों से बच्चों में कुपोषण कम होने, हरियाली बढ़ने और इमारती लकड़ियों की बिक्री से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद जताई गई थी।

स्रोत