दिल्ली में नई आबकारी नीति का मसौदा तैयार, त्योहारों से पहले मदिरा की कीमतें बढ़ने के आसार

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में आगामी त्योहारी मौसम से पहले मदिरा के खुदरा भाव में बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है। शासन स्तर पर तैयार की गई नई आबकारी नीति का अंतिम मसौदा पूरा हो चुका है। आबकारी विभाग में नए आयुक्त की तैनाती के बाद इस मसौदे को दिल्ली मंत्रिमंडल तथा उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की औपचारिक मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार प्रशासन का प्रयास है कि अक्टूबर में त्योहारों का सीजन चरम पर पहुंचने से पहले ही इस नीतिगत व्यवस्था को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया जाए।
प्रस्तावित नीति के तहत दरों में बदलाव का मुख्य कारण उत्पाद शुल्क में संभावित वृद्धि है। शहर में इस समय थोक मूल्य स्लैब एवं मदिरा की विभिन्न श्रेणियों के आधार पर तीस फीसदी से तीन सौ फीसदी तक आबकारी शुल्क वसूला जाता है। यदि कर ढांचे में बदलाव होता है तो बोतलों के खुदरा भाव सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
इसके साथ ही खुदरा विक्रेताओं के तयशुदा लाभ मार्जिन को समाप्त करने की तैयारी है। वर्तमान नियमों के तहत भारतीय निर्मित विदेशी मदिरा पर पचास रुपये तथा आयातित शराब पर सौ रुपये का निश्चित मार्जिन निर्धारित है। इस सीमित मुनाफे के चलते दुकानदार एक हज़ार रुपये से अधिक मूल्य वाली प्रीमियम मदिरा की पर्याप्त खेप रखने में संकोच करते थे। परिणामस्वरूप राजधानी के ग्राहकों को खरीदारी के लिए गुरुग्राम और फरीदाबाद का रुख करना पड़ता था।
राजस्व में इजाफा करने तथा स्थानीय स्तर पर आपूर्ति सुधारने के उद्देश्य से नई नीति में प्रीमियम विक्रय केंद्रों की संख्या बढ़ाने का विचार है। हालांकि खुदरा दुकानों का प्रबंधन निजी हाथों में नहीं सौंपा जाएगा। व्यवस्था के तहत केवल चार सरकारी निगम ही बिक्री केंद्रों का संचालन जारी रखेंगे। पुरानी विवादास्पद आबकारी नीति को केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय की जांच के बाद निरस्त किया गया था। मौजूदा समय में सरकारी उपक्रम शहर में सात सौ से अधिक दुकानों की व्यवस्था संभाल रहे हैं। इसके अतिरिक्त नई व्यवस्था में क्लब, होटल और रेस्तरां के भीतर शराब परोसने की समय-सीमा में भी फेरबदल संभावित है।