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दुर्ग में शिक्षक भर्ती आंदोलन के बाद पाँच अभ्यर्थियों को एसडीएम का नोटिस, शांति बंधपत्र पर माँगा स्पष्टीकरण

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Mananjpatel1996 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

दुर्ग ज़िले में आगामी शिक्षक भर्ती से संबंधित विभिन्न मांगों को लेकर सड़क पर उतरे अभ्यर्थियों के विरुद्ध बाउंड ओवर की वैधानिक प्रक्रिया आरंभ की गई है। अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय ने आंदोलन का नेतृत्व करने वाले लगभग पाँच अभ्यर्थियों को नोटिस प्रेषित कर अठारह अगस्त को न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश जारी किया है।

पुलिस की ओर से एसडीएम न्यायालय को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न ज़िलों से एकत्रित हुए अभ्यर्थियों ने तेरह अगस्त को हिंदी भवन के समक्ष मुख्य मार्ग पर अनधिकृत रूप से धरना-प्रदर्शन किया था। पुलिस का प्रतिवेदन है कि प्रशासनिक अनुमति के अभाव में किए गए इस जमावड़े की वजह से मार्ग पर आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध हो गया था। इसके उपरांत पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 से 135(3) के वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत मामले को एसडीएम न्यायालय को प्रेषित किया।

पुलिस प्रतिवेदन पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम न्यायालय ने चौदह अगस्त को बीएनएसएस की धारा 130 के अंतर्गत प्रारंभिक आदेश पारित किया। इस आदेश के माध्यम से चिन्हित अभ्यर्थियों से यह जवाब माँगा गया है कि आगामी छह माह की समयावधि तक शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु उनसे पचास-पचास हज़ार रुपये की प्रतिभूति वाले बंधपत्र क्यों न निष्पादित कराए जाएँ।

दूसरी ओर, आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों का पक्ष है कि वे शिक्षक भर्ती में विज्ञान शिक्षक, जीव विज्ञान व्याख्याता, रसायन व्याख्याता और गणित व्याख्याता के पदों को सम्मिलित कराने तथा सीटीईटी से संबंधित विसंगतियों के निराकरण के लिए शांतिपूर्ण ढंग से एकत्रित हुए थे। अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि इन विशिष्ट विषयों के पद भर्ती विज्ञापन में शामिल नहीं किए गए, तो वर्षों से प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के अवसर समाप्त हो जाएँगे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शिक्षा मंत्री के ज़िले में लोकतांत्रिक ढंग से रोज़गार का अवसर माँगने पर प्रशासनिक नोटिस जारी कर उन पर अतिरिक्त मानसिक और आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है।

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