निजी तकनीकी शिक्षण संस्थाओं में बिना प्रवेश परीक्षा दाखिले पर DTE की चेतावनी, सीधे प्रवेश होंगे अमान्य

छत्तीसगढ़ के तकनीकी शिक्षा संचालनालय ने निजी विश्वविद्यालयों और गैर-सहायता प्राप्त व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों को दाखिला नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित सामान्य प्रवेश परीक्षा और तय व्यवस्था के बिना सीधे दिए गए सभी दाखिले अवैध माने जाएंगे। यदि नियमों के उल्लंघन के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होती है या उनका साल खराब होता है, तो इसकी पूरी जवाबदेही संबंधित विश्वविद्यालय प्रबंधन की होगी।
तकनीकी शिक्षा संचालनालय द्वारा राज्य के सभी निजी संस्थानों के कुलसचिवों को भेजे गए आधिकारिक पत्र में छत्तीसगढ़ निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्था प्रवेश का विनियमन और शुल्क का निर्धारण अधिनियम 2008 का हवाला दिया गया है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि वर्ष 2008 के अधिनियम में दर्ज कानूनी प्रावधानों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। कानून के तहत गैर-अनुदान प्राप्त निजी तकनीकी संस्थानों की स्वीकृत सीटों पर दाखिला केवल राज्य शासन की अधिकृत प्रक्रिया और मेरिट सूची के अनुसार ही होना चाहिए।
संचालनालय के अनुसार यह व्यवस्था बीई, बीटेक, एमटेक, एमबीए, एमसीए, डिप्लोमा इन इंजीनियरिंग और फार्मेसी जैसे सभी तकनीकी पाठ्यक्रमों पर प्रभावी होगी। इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सीजी पीईटी, सीजी पीपीएचटी, पीपीटी, प्री-एमसीए और जेईई जैसी राज्य व राष्ट्रीय स्तर की मान्यता प्राप्त परीक्षाओं की मेरिट सूची का पालन करना अनिवार्य है। विभागीय निर्देश के अनुसार प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए सरकार द्वारा तय विशिष्ट प्रवेश परीक्षा के आधार पर ही सीटें आवंटित की जा सकती हैं।
दिशा-निर्देशों की अवहेलना कर सीधे तौर पर दिए गए दाखिलों को अधिनियम के तहत शून्य घोषित किया जा सकता है। शासन के अनुसार ऐसे अमान्य प्रवेशों के चलते उपाधि की मान्यता रद्द होने या छात्रवृत्ति की पात्रता समाप्त होने जैसी समस्याओं के लिए सीधे तौर पर निजी विश्वविद्यालय जिम्मेदार रहेंगे।