नेत्र जांच अभियान: लक्ष्य छोटा करने निजी स्कूल जांच से बाहर, चश्मा टेंडर भी रद्द

छत्तीसगढ़ में स्कूली छात्र-छात्राओं के नेत्र परीक्षण और निशुल्क चश्मा वितरण की कार्ययोजना में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा बदलाव किया है। चालू शैक्षणिक सत्र का आधा समय बीत जाने के बाद भी जांच प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। इसी के मद्देनजर विभाग ने निर्धारित लक्ष्य को सीमित करने के उद्देश्य से निजी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को फिलहाल जांच दायरे से अलग कर दिया है। इसके अतिरिक्त कई जिलों में चश्मों की खरीद से जुड़ी निविदाएं भी निरस्त कर दी गई हैं।
इस शैक्षणिक सत्र के दौरान हाई एवं हायर सेकेंडरी शालाओं को भी राष्ट्रीय अभियान में जोड़ा गया था। इसके चलते राज्य भर में लगभग पांच लाख बच्चों की दृष्टि जांचने का व्यापक लक्ष्य तय हुआ था। मैदानी जांच दलों की सुस्त गति और सीमित पहुंच के कारण अब तक बहुत कम विद्यालयों में ही टीमें पहुंच सकी हैं। फरवरी माह से विद्यार्थियों की वार्षिक परीक्षाएं आरंभ होने वाली हैं, जबकि अप्रैल में नवीन शैक्षणिक सत्र शुरू होगा। ऐसे में स्वास्थ्य अमले के पास इस पूरे कार्य को निबटाने के लिए केवल नवंबर, दिसंबर और जनवरी का तीन माह का समय ही बचा है।
समय के इसी अभाव को देखते हुए रायपुर सहित अनेक जिलों में निजी स्कूलों की पड़ताल स्थगित कर दी गई है। रायपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने हाल ही में करीब पैंतालीस विद्यालयों की अद्यतन सूची जारी की है। इसमें केवल शासकीय संस्थाओं के लगभग दस हजार विद्यार्थियों की आंखें नवंबर माह के भीतर जांचने का निर्देश दिया गया है। पूर्व की सूची में निजी संस्थान भी शामिल थे, किंतु क्षेत्रीय दलों के संशय को समाप्त करने के लिए अब सिर्फ सरकारी स्कूलों के नाम रखे गए हैं।
दूसरी ओर दृष्टि दोष वाले बच्चों के लिए चश्मों की व्यवस्था भी अटक गई है। नियमों की कड़ी शर्तों के चलते स्थानीय सप्लायर प्रक्रिया में भाग नहीं ले पा रहे हैं। इसी कारण बिलासपुर जिले में पंद्रह हजार से ज्यादा और बलौदाबाजार में लगभग साढ़े पांच हजार चश्मों की निविदाएं निरस्त कर दी गई हैं। इससे पहले तीन अन्य जिलों के टेंडर भी इसी तरह विफल हो चुके हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रथम चरण में केवल शासकीय शालाओं पर ध्यान दिया जाएगा, जिसके बाद ही निजी संस्थाओं के संबंध में विचार होगा।