गैर-जनहानि वाले नक्सल मामलों की विधिक समीक्षा, पात्र बंदियों की रिहाई प्रक्रिया तेज करने के निर्देश

छत्तीसगढ़ शासन ने ऐसे नक्सल मामलों की कानूनी समीक्षा करने का फैसला लिया है जिनमें किसी भी व्यक्ति की जान नहीं गई है। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित गृह और पुलिस विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने पात्र बंदियों की रिहाई तथा अभियोजन वापसी की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य विधिक नियमों के तहत राहत पाने योग्य बंदियों के मामलों का समय पर निस्तारण करना है।
समीक्षा बैठक में तय कार्ययोजना के अंतर्गत विधि विभाग के सहयोग से अभियोजन अधिकारियों और शासकीय वकीलों का एक विशेष दल बनाया जाएगा। यह दल केवल उन प्रकरणों की वैधानिक जांच करेगा जहां कोई जनहानि दर्ज नहीं हुई है। जिन मुकदमों में कानून अनुमति देगा, उनमें प्रकरण वापस लेने के बिंदु पर विचार किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की प्रगति का आकलन करने के लिए संबंधित ज़िला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में प्रत्येक सप्ताह समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक में पुनर्वास और स्थानीय विकास से जुड़े फैसले भी लिए गए। नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किए गए कुल पचास गांवों के बुनियादी विकास के लिए प्रति गांव एक करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई है। प्रथम चरण के तहत सुकमा के बीस, बीजापुर के बीस और नारायणपुर के दस गांवों को इस स्वीकृति में शामिल किया गया है। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि 15 अगस्त 2026 को इन सभी चिन्हित गांवों में तिरंगा फहराया जाए ताकि राष्ट्रीय एकता का संदेश पहुंचे।
शासन ने स्पष्ट किया है कि नक्सल हिंसा से प्रभावित तथा पुनर्वासित सभी परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया जाएगा। इसके साथ ही, मुख्यधारा में लौटे युवाओं के लिए घोषित प्रोत्साहन राशि का भुगतान एक माह के भीतर पूरा करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं।