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बस्तर में 1280 शहीद जवानों की तैयार हुई डिजिटल प्रोफाइल, क्यूआर कोड से मिलेगी जानकारी

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Iamg / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)

बस्तर संभाग में नक्सल मोर्चे पर कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सुरक्षा बलों के जवानों का विवरण अब डिजिटल तकनीक के जरिए सहेजा जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत शहीद जवानों के चित्रों और स्मारकों पर त्वरित प्रतिक्रिया यानी क्यूआर कोड अंकित किए जा रहे हैं। कोई भी नागरिक अपने मोबाइल फोन से इन कोड को स्कैन करके संबंधित जवान की तैनाती, सेवाकाल और शहादत की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकेगा।

प्राप्त विवरण के अनुसार, वर्ष 2000 से 2026 के दौरान बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जैसे अत्यधिक संवेदनशील ज़िलों में लगभग 1280 जवानों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। इस क्षेत्र में ताड़मेटला, रानी बोदली, मिनपा और बुरकापाल जैसे बड़े नक्सली हमलों में बलों को भारी क्षति का सामना करना पड़ा था। इन बलिदानों को केवल आंकड़ों तक सीमित रखने के बजाय हर एक जवान के योगदान को आम जनता तक पहुँचाने के लिए यह डिजिटल संग्रह तैयार किया गया है।

तैयार की जा रही डिजिटल प्रोफाइल के माध्यम से आगंतुक जवान के पद, कार्यक्षेत्र, नक्सल विरोधी मुठभेड़ की तिथि और क्षेत्र में शांति स्थापित करने में उनके समर्पण का पूरा ब्योरा देख सकेंगे। इसके साथ ही जिन स्थानों पर जवानों ने शहादत दी, वहाँ की मिट्टी को भी स्मृति के रूप में एकत्र करके सुरक्षित रखा जा रहा है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर क्षेत्र में राष्ट्रभक्ति और शांति का संदेश देने के उद्देश्य से ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ का आयोजन किया गया। यह यात्रा उन अंदरूनी और संवेदनशील क्षेत्रों तक निकाली जा रही है, जहाँ कभी नक्सली हिंसा की घटनाएँ हुई थीं। इस क्रम में सुकमा ज़िले के दुर्गम इलाकों से गुजरने वाली यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप के शामिल होने तथा बाइक के माध्यम से सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचने की योजना तय की गई।

देश में नक्सल मोर्चे पर दी गई शहादतों को इस तरह डिजिटल रूप में संरक्षित करने की यह पहली पहल है, जिससे जवानों के त्याग का स्थायी और प्रामाणिक दस्तावेज़ तैयार हो रहा है।

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