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बिलासपुर वेटरनरी कॉलेज को सात साल बाद मिली मान्यता, दाखिले से पहले स्टाफ की वापसी अधर में

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Domino786 / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

बिलासपुर स्थित वेटरनरी कॉलेज को सात साल के लंबे अंतराल के बाद शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पुनः मान्यता मिल गई है। नीट के परिणाम जारी होने के बाद अब संस्थान में दाखिले की प्रक्रिया अगस्त के अंतिम सप्ताह से शुरू होने जा रही है। इसके विपरीत कॉलेज के लिए चयनित और नियुक्त शैक्षणिक अमले को अब तक उनके मूल पदस्थापना स्थल पर नहीं भेजा गया है।

इस संस्थान को मान्यता दिलाने का प्रयास पिछले दस वर्षों से चल रहा था। सात वर्ष पूर्व एक सत्र के लिए मान्यता मिलने के उपरांत प्रयोगशाला, शैक्षणिक फैकल्टी और जरूरी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में आवेदन लगातार खारिज होते रहे। इन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के क्रम में विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक श्रेणी के लगभग 22 नियमित शैक्षणिक पदों पर नियुक्तियां की थीं। कॉलेज को समय पर स्वीकृति न मिलने के कारण इस स्टाफ को अंजोरा कॉलेज, विश्वविद्यालय मुख्यालय और राज्य के विभिन्न पॉलिटेक्निक संस्थानों में प्रशासनिक व अन्य कार्यों की जिम्मेदारी सौंप दी गई थी।

दाखिला प्रक्रिया नजदीक आने के बाद भी संबंधित शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर मूल संस्थान नहीं भेजा गया है। इस विषय पर दुर्ग ग्रामीण के विधायक ललित चंद्राकर ने भी कुलसचिव को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शिक्षकों से केवल अध्यापन कार्य लिया जाए और उन्हें प्रशासनिक दायित्वों से तुरंत हटाया जाए। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से अब तक कोई कार्यमुक्ति आदेश जारी नहीं हो सका है। अन्य संस्थानों में सेवाएं दे रहे प्रमुख शैक्षणिक सदस्यों में डॉ. मंजू राय, डॉ. मनोज गेंदले, रूपल पाठक, सोनाली पुष्टि, दीपक जायसवाल और गोविंद देवांगन शामिल हैं।

संस्थान में नए सत्र की पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। राज्य के पॉलिटेक्निक संस्थानों में नियमित शैक्षणिक स्टाफ की कमी के चलते पहले से ही व्यवस्थाएं प्रभावित हैं और वे अन्य संस्थानों के अध्यापकों के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में बिलासपुर कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया और अध्यापन कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मूल स्टाफ को तत्काल पदस्थ करना आवश्यक बना हुआ है।

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