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महासमुंद में धान उपार्जन से पहले 202 केंद्रों की 35 पैमानों पर होगी प्रशासनिक जांच

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Harvinder Chandigarh / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

महासमुंद जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इस सत्र में जिले के सभी 202 उपार्जन केंद्रों में 15 नवंबर से लेकर 15 जनवरी 2027 तक धान की आवक दर्ज की जाएगी। उपार्जन प्रक्रिया में किसी भी किस्म की अव्यवस्था और अनाधिकृत धान की आवक रोकने के लिए प्रशासन की ओर से 35 बिंदुओं पर आधारित एक विशेष पड़ताल सूची तैयार की गई है। इस बार कुल उपार्जन स्थलों में 20 नए केंद्र भी शामिल किए गए हैं, जिनका प्रारंभिक निरीक्षण तय मापदंडों के अनुसार किया जाएगा।

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने वन विभाग के प्रशिक्षण हॉल में आयोजित नोडल अफसरों और उपार्जन समिति प्रबंधकों की समीक्षा बैठक में कहा कि खरीदी कार्यों में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने खरीदी आरंभ होने से पूर्व ही भौतिक सत्यापन पूरा कर सभी तकनीकी व बुनियादी खामियों को सुधारने के निर्देश दिए हैं। शासन के मौजूदा प्रावधानों के तहत किसानों से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान उपार्जित किया जाएगा।

प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार प्रत्येक उपार्जन स्थल पर निर्बाध इंटरनेट नेटवर्क, अस्थाई बिजली व्यवस्था, कंप्यूटर, प्रिंटर, यूपीएस तथा बैकअप के रूप में जनरेटर का होना अनिवार्य किया गया है। सिस्टम और टैबलेट में खरीदी से जुड़ा सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के साथ-साथ परिसर में निगरानी हेतु सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएंगे। तौल व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कांटा-बांट का प्रमाणीकरण और धान की नमी जांचने वाले आर्द्रतामापी यंत्र का कैलिब्रेशन सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके अतिरिक्त धान की गुणवत्ता परखने के लिए एफएक्यू मापदंड और धान के नमूने भी प्रदर्शित किए जाएंगे।

किसानों को अपनी उपज लाने हेतु टोकन तुहर एप के जरिए टोकन जारी किए जाएंगे। निर्धारित दिशा-निर्देशों के मुताबिक दो एकड़ तक के रकबे पर एक, दस एकड़ तक दो और उससे अधिक रकबे वाले काश्तकारों को तीन टोकन प्राप्त होंगे। पंजीयन व्यवस्था में सत्तर फीसदी किसान मोबाइल एप से और तीस फीसदी किसान सीधे समितियों के जरिए सुविधा ले सकेंगे। केंद्रों में धान के सुरक्षित भंडारण के लिए पर्याप्त बारदाने, डनेज, तारपोलिन और हमालों की उपलब्धता के साथ किसानों के लिए पेयजल, शौचालय और प्राथमिक उपचार पेटी की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

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