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मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना: फर्जीवाड़े पर रोक के लिए आधार प्रमाणीकरण हुआ अनिवार्य

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: VishuN / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में फर्जी पंजीयन और बार-बार लाभ उठाने के मामलों पर लगाम लगाने के लिए अब आधार प्रमाणीकरण को अनिवार्य बना दिया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विवाह सहायता राशि और वैवाहिक सामग्री पाने के लिए केवल आधार कार्ड की छायाप्रति जमा करना अब पर्याप्त नहीं होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के माध्यम से हितग्राही की पहचान का ऑनलाइन सत्यापन किया जाएगा।

पूर्व व्यवस्था के तहत मात्र फोटोकॉपी जमा कराने का नियम था। इससे अभिलेखों में आधार संख्या तो दर्ज हो जाती थी, लेकिन संबंधित व्यक्ति की वास्तविक उपस्थिति और पहचान सत्यापित नहीं हो पाती थी। इस कारण पहले से शादीशुदा जोड़ों द्वारा दोबारा पंजीकरण कराने तथा सामग्री वितरण में गड़बड़ियों की शिकायतें मिल रही थीं। नई व्यवस्था लागू होने से इस प्रकार के फर्जीवाड़े पर प्रभावी नियंत्रण लगने की उम्मीद है।

हालांकि, ऑनलाइन प्रमाणीकरण से केवल आवेदक की पहचान ही पुख्ता हो सकेगी। आवेदक पूर्व में विवाहित है अथवा नहीं, तथा वह योजना की अन्य सभी निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करता है या नहीं, इसकी जांच विभाग को अलग से ही करनी होगी।

प्रक्रिया के दौरान तकनीकी समस्याओं को देखते हुए वैकल्पिक प्रावधान भी किए गए हैं। यदि किसी आवेदक के उंगलियों के निशान से बायोमेट्रिक मिलान नहीं हो पाता है, तो आंखों की पुतली या चेहरे के मिलान से सत्यापन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त, जिन पात्र हितग्राहियों के पास आधार कार्ड उपलब्ध नहीं है, उन्हें नया पंजीयन कराना पड़ेगा। कार्ड मिलने तक ऐसे आवेदक आधार नामांकन की रसीद और शासन द्वारा मान्य वैकल्पिक पहचान पत्रों के सहारे योजना का लाभ उठा सकेंगे, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सहायता से वंचित न रह जाए।

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