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राजा रघुवंशी मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट में सोनम की ज़मानत रद्द करने की अर्ज़ी पर सुनवाई टली

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: aajtak.in

राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को दी गई ज़मानत रद्द कराने के मामले में उच्चतम न्यायालय में सुनवाई आगे बढ़ गई है। मेघालय प्रशासन ने उच्च न्यायालय द्वारा अभियुक्त को ज़मानत देने के फैसले को चुनौती दी है। शासन का कहना है कि आरोपी को खुली छूट मिलने से न्याय प्रक्रिया बाधित हो सकती है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष इस मामले का ज़िक्र कर तत्काल सुनवाई का आग्रह किया था। अभियोजन की ओर से दलील दी गई कि गंभीर आपराधिक आरोपों के बावजूद उच्च न्यायालय ने ज़मानत देकर त्रुटि की है। सरकार ने न्यायालय में स्पष्ट किया कि ज़मानत पर बाहर रहने के दौरान आरोपी के देश छोड़कर फरार होने का गंभीर ख़तरा बना हुआ है।

इस कानूनी विवाद की शुरुआत निचली अदालत द्वारा अभियुक्त को दी गई राहत से हुई थी। मेघालय उच्च न्यायालय ने बीते 29 जून को निचली अदालत के ज़मानत संबंधी आदेश को बरकरार रखा था। गिरफ़्तारी के समय कानूनी आधार वाले दस्तावेज़ पूरी तरह उपलब्ध न कराए जाने को ज़मानत का मुख्य कारण माना गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, काग़ज़ात में यह विसंगति केवल एक टंकण त्रुटि की वजह से हुई थी, जिसमें ग़लत कानूनी धारा दर्ज हो गई थी।

घटनाक्रम के विवरण के मुताबिक, वर्ष 2025 में राजा रघुवंशी और उनकी पत्नी सोनम मेघालय के पर्यटन केंद्र सोहरा में हनीमून के लिए पहुँचे थे। दोनों के 23 मई 2025 को अचानक ग़ायब होने की सूचना सामने आई थी। गहन खोजबीन के पश्चात 2 जून 2025 को राजा रघुवंशी का मृत शरीर एक गहरी खाई में मिला था।

पुलिस की तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि धन और जायदाद हड़पने के मकसद से सोनम ने अपने पति की हत्या कराने का षड्यंत्र रचा था। इसके लिए सुपारी देकर भाड़े के हत्यारों की मदद ली गई थी। राज्य सरकार अब तकनीकी खामियों के आधार पर मिली राहत को ख़ारिज कराकर मुख्य अभियुक्त को दोबारा जेल भेजने के लिए शीर्ष अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ रही है।

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