रायपुर के गोलबाजार का कायाकल्प: मॉल जैसी सुविधाओं के प्रस्ताव के बीच दुकानदारों में तोड़फोड़ की आशंका

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक गोलबाजार को आधुनिक रूप देने की रूपरेखा पेश होने के बाद स्थानीय दुकानदारों में अपनी दुकानों के प्रभावित होने का संशय खड़ा हो गया है। नगर निगम की ओर से व्यापारियों को बाजार की जमीन का मालिकाना अधिकार दिए जाने के बाद इस स्थल को मॉल की तर्ज पर विकसित करने की बात सामने आई थी। शासन के अनुसार इस अमूल्य धरोहर के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए सभी सुविधाओं का विस्तार किया जाना है।
योजना के तकनीकी प्रारूप के अनुसार बाजार के बुनियादी ढांचे को संवारने के लिए कई बदलाव प्रस्तावित हैं। इसके तहत आवागमन को नियंत्रित करने के उद्देश्य से वर्तमान 18 प्रवेश द्वारों को घटाकर केवल 6 मुख्य द्वार रखने की तैयारी की गई है। इसके अलावा बाजार के प्राचीन गुंबद को संवारने, सड़कों को चौड़ा करने, भूमिगत केबल के माध्यम से मार्ग प्रकाश व्यवस्था करने, सार्वजनिक प्रसाधन और आगंतुकों के लिए प्रतीक्षालय बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। एक निजी निर्माण एजेंसी के तकनीकी विशेषज्ञों ने इस योजना के डिजाइन प्रस्तुत किए हैं।
इन नए निर्माण कार्यों की जानकारी सामने आने के बाद पीढ़ियों से व्यवसाय कर रहे कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है। बाजार प्रतिनिधि सतीश जैन के अनुसार नवीनीकरण का सटीक प्रारूप स्पष्ट न होने से व्यापारियों में असमंजस है। दुकानदारों का मानना है कि अत्यंत सघन और संकरी गलियों वाले इस बाजार में खाली जगह बिल्कुल नहीं है। ऐसे में बिना मौजूदा निर्माण को हटाए नए प्रसाधन केंद्र अथवा प्रतीक्षालय स्थापित करना संभव नहीं दिखता, जिससे पुरानी दुकानों के तोड़े जाने का डर बना हुआ है।
दूसरी तरफ, नगर निगम प्रशासन का दावा है कि इस कायाकल्प योजना के क्रियान्वयन के दौरान किसी भी कारोबारी को उसकी जगह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। जमीन का मालिकाना हक मिलने के बाद जहाँ व्यापारियों ने राहत की सांस ली थी, वहीं अब वास्तविक निर्माण शुरू होने पर स्थान की कमी के कारण उपजे सवालों पर व्यापारी वर्ग स्पष्ट नीति का इंतजार कर रहा है।