योजनारायपुर

असम के बाढ़ प्रभावितों के लिए 5 करोड़ रुपये की सहायता राशि देगी छत्तीसगढ़ सरकार

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Ms Sarah Welch / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ शासन ने असम में भीषण बाढ़ का सामना कर रहे नागरिकों की सहायता के लिए पाँच करोड़ रुपये की राहत राशि देने का फैसला किया है। राज्य के जनसंपर्क विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यह वित्तीय सहयोग पूर्वोत्तर राज्य में चल रहे राहत एवं पुनर्वास अभियानों में हाथ बंटाने के उद्देश्य से स्वीकृत किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सहायता राशि अंतरराज्यीय समन्वय और मानवीय संवेदनशीलता के दृष्टिकोण से प्रदान की जा रही है।

अधिकारियों से प्राप्त विवरण के मुताबिक, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से दूरभाष पर विस्तार से संपर्क साधा। इस बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने असम के विभिन्न अंचलों में बाढ़ के चलते बने गंभीर हालातों की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने संकटग्रस्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक विपदा के इस बेहद चुनौतीपूर्ण समय में छत्तीसगढ़ का जनमानस असम के नागरिकों के साथ पूरी दृढ़ता और एकजुटता से खड़ा है।

पूर्वोत्तर राज्य में आपदा की स्थिति को लेकर असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की ओर से जारी आधिकारिक दैनिक बुलेटिन में बताया गया है कि वहां बाढ़ का संकट लगातार चिंताजनक बना हुआ है। प्राधिकरण के अनुसार, बीते चौबीस घंटों के दौरान गोलाघाट तथा कार्बी आंगलोंग ज़िलों में दो व्यक्तियों की मौत दर्ज की गई है। इन ताज़ा मौतों के बाद इस साल राज्य में बाढ़ जनित हादसों से जान गंवाने वाले नागरिकों की कुल तादाद बढ़कर 100 पर पहुँच गई है।

प्राधिकरण के ताजा आंकड़ों के अनुसार, असम के सात अलग-अलग ज़िलों में करीब 1.4 लाख लोग जलभराव की समस्या से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। राज्य के कुल 456 गाँव पूरी तरह बाढ़ के पानी की चपेट में आ चुके हैं, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इसके अलावा लगभग 11,933.46 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली कृषि फसलों को व्यापक स्तर पर भारी नुकसान पहुँचा है। आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि पूर्वोत्तर राज्य की कई प्रमुख नदियाँ अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे नए मैदानी इलाकों तथा रिहायशी बस्तियों में पानी फैलने का गंभीर ख़तरा बना हुआ है।

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