रायपुर नगर निगम: प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों में तालमेल की कमी पर सभापति ने जताई चिंता

रायपुर नगर निगम मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान निगम सभापति सूर्यकांत राठौर ने प्रशासनिक अधिकारियों तथा निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच जारी तनातनी पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों के व्यक्तिगत टकराव और अहं के कारण राजधानी के विकास कार्यों के साथ आम जनता के हितों को नुकसान पहुंच रहा है। यह संस्थान विवाद खड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों की सेवा के लिए बना है।
सभापति सूर्यकांत राठौर ने अपने पच्चीस वर्ष के राजनीतिक और प्रशासनिक सफर का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस लंबी अवधि में वे पार्षद, मेयर इन काउंसिल के सदस्य तथा नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। इस दौरान तीन बार कांग्रेस और दो बार भारतीय जनता पार्टी का कार्यकाल रहा, किंतु निगम के भीतर ऐसी अव्यवस्था कभी नहीं देखी गई। पिछले कुछ महीनों में अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों पर पुलिस थानों में प्राथमिकियां दर्ज कराने की घटनाओं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि आपसी बातचीत के अभाव में प्रकरण पुलिस और अदालत तक खिंच रहे हैं, जिन्हें संवाद के जरिए आसानी से निपटाया जा सकता था।
सभापति ने पूर्व कर्मचारियों तथा सेवानिवृत्त अधिकारियों के जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि पहले निगम को एक परिवार की तरह समझा जाता था, लेकिन अब वैसा आत्मीय भाव कम होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने दोनों पक्षों से तालमेल बनाकर दायित्वों के निर्वहन की अपील की।
इस विषय पर महापौर मीनल चौबे ने निकाय में किसी प्रत्यक्ष टकराव अथवा लड़ाई की बात को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए दोनों पक्षों को आपसी समन्वय पर ध्यान देना होगा। साथ ही उन्होंने निर्वाचित प्रतिनिधियों और अधिकारियों दोनों को अपनी भाषा में संयम बरतने की सलाह दी ताकि नगर के विकास कार्य बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सकें।
दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने सभापति के दृष्टिकोण का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अधिकारी और जनसेवक व्यवस्था रूपी सिक्के के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। सभापति ने अपने लंबे अनुभव के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने रखी है। आपसी संवादहीनता से केवल शहर की प्रगति बाधित होगी, इसलिए टकराव छोड़कर सभी को मिलकर काम करना चाहिए।