रायपुर में सीवेज और ड्रेनेज के लिए 3500 करोड़ रुपये तक की परियोजना की संभावना, 16वें वित्त आयोग की सूची में शामिल

रायपुर में सीवेज, नालियों और अपशिष्ट जल के निपटारे के लिए 3500 करोड़ रुपये तक की परियोजना तैयार करने की संभावना बनी है। 16वें वित्त आयोग ने देश के 22 शहरों को अपशिष्ट जल प्रबंधन के विशेष बुनियादी ढाँचा घटक में शामिल किया है, जिसमें रायपुर का नाम भी सम्मिलित है। इस सूची में पुणे, जयपुर, लखनऊ, कानपुर, नागपुर, इंदौर, भोपाल, पटना, वडोदरा, लुधियाना, फरीदाबाद और राजकोट जैसे अन्य शहर भी शामिल किए गए हैं।
आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार 15 लाख से कम आबादी वाले पात्र शहरों के लिए परियोजना लागत की अधिकतम सीमा 3500 करोड़ रुपये तय की गई है। वित्तीय व्यवस्था के अंतर्गत कुल स्वीकृत लागत का 60 प्रतिशत हिस्सा यानी अधिकतम 2100 करोड़ रुपये केंद्र सरकार दे सकती है। शेष 40 प्रतिशत राशि यानी 1400 करोड़ रुपये राज्य शासन और नगर निगम को मिलकर वहन करने होंगे।
यह धनराशि स्वतः मंजूर नहीं हुई है, बल्कि यह परियोजना की ऊपरी सीमा है। प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार पहले आवश्यकताओं का अध्ययन कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। इसके बाद राज्य और केंद्र स्तर पर तकनीकी व वित्तीय जांच के उपरांत अंतिम स्वीकृति दी जाएगी। स्वीकृति मिलने के बाद केंद्र, राज्य शासन और नगर निगम के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
इस विशेष कोष का इस्तेमाल सामान्य निर्माण कार्यों में नहीं किया जाएगा। इसका उपयोग सीवेज नेटवर्क के विस्तार, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण, गंदे पानी के शोधन और वर्षा जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ही होगा।
आयोग ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए देश के सभी नगरीय निकायों हेतु 3.56 लाख करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है। इसमें छत्तीसगढ़ राज्य के सभी शहरी निकायों के लिए बेसिक और परफॉर्मेंस ग्रांट के रूप में कुल 4990 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है।
केंद्र सरकार की वित्तीय हिस्सेदारी किस्तों में दी जाएगी। पहली किस्त एमओयू होने के उपरांत जारी की जा सकती है, जबकि अगली किस्तें कार्य की प्रगति और राशि के उपयोग के आधार पर मिलेंगी। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद संपत्तियों के रखरखाव का दायित्व नगर निगम का होगा।