
जीएसएलवी रॉकेट के ज़रिए भारत का पहला जियो-इमेजिंग उपग्रह भेजा गया
जीएसएलवी रॉकेट ने देश के पहले जियो-इमेजिंग उपग्रह को ले जाकर अपनी पुरानी छवि को पीछे छोड़ दिया है।

जीएसएलवी रॉकेट ने देश के पहले जियो-इमेजिंग उपग्रह को ले जाकर अपनी पुरानी छवि को पीछे छोड़ दिया है।

सामने आई जानकारी के अनुसार दुनिया का तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर सकता है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की एक नई रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी को अब टाला नहीं जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेस स्टार्टअप्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने का सुझाव देते हुए सरकार के पूरे समर्थन का आश्वासन दिया।

भारतीय चिप्स के अंतरिक्ष अभियानों में उपयोग को लेकर विवरण उपलब्ध कराया गया है।

वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियों में भारत का रॉकेट प्रक्षेपण खर्च सबसे अधिक रहा। वैश्विक औसत 3,868 डॉलर की तुलना में भारत में यह लागत 13,302 डॉलर प्रति किलोग्राम रही।

भारत की ओर से तकनीकी कंपनी गूगल को धोखाधड़ी वाले खातों को समाप्त करने के लिए कहा गया है।

जाने-माने भौतिक विज्ञानी दीपक धर ने साल 2026 का डिराक मेडल जीत लिया है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलने की घोषणा की गई है।

नासा ने अपने नवीनतम चंद्र कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इसरो को न्योता दिया है। इस अभियान का मकसद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास इंसानी चौकी बनाना है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने चंद्रमा बेस अभियान में इसरो को भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है। दोनों एजेंसियां अंतरिक्ष अनुसंधान में सहयोग बढ़ा सकती हैं।

वर्ष के अंत तक दशकों के सबसे मजबूत अल नीनो के उभरने की आशंका जताई गई है। इसके चलते भारत के संदर्भ में संभावित प्रभावों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में प्रगति की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसके लिए 10 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता है।

भारत ने सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए 2028 से नई तकनीक की योजना बनाई है। इस तकनीक से वाहन आपस में संवाद कर सकेंगे।

केंद्र सरकार ने मेटा के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री और खाता प्रबंधन के मुद्दों पर चिंता व्यक्त की है। इन समस्याओं के समाधान के लिए मेटा से अपेक्षाएँ की गई हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वास्थ्य सेवा में रोगों की पहचान और पूर्वानुमान के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक निदान से आगे बढ़कर रोगों की भविष्यवाणी में सहायक हो सकती है।