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घरेलू गैस सब्सिडी के लिए 1 अक्टूबर से पहले ई-केवाईसी अनिवार्य, पोर्टल और ऐप से भी प्रमाणीकरण की सुविधा

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Ms Sarah Welch / Wikimedia Commons (CC0)

घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए केंद्र सरकार ने ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन कराना अनिवार्य किया है। 1 अक्टूबर 2026 तक जिन उपभोक्ताओं का सत्यापन पूरा नहीं होगा, उनके बैंक खातों में मिलने वाली सब्सिडी रोकी अथवा निरस्त की जा सकती है। तय तिथि के बाद केवल आधार बायोमेट्रिक से जुड़े ग्राहकों को ही रियायती दर का लाभ मिलेगा। सत्यापन अधूरा रहने पर उपभोक्ताओं को सिलेंडर सामान्य बाजार दर पर खरीदना पड़ेगा, जिससे प्रति रिफिल करीब 200 से 300 रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है।

सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य रसोई गैस पर दी जाने वाली आर्थिक सहायता को वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाना है। इसके जरिए फर्जी गैस कनेक्शनों और घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

उपभोक्ता घर बैठे स्मार्टफोन के जरिए भी सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित गैस कंपनी एचपी, इंडेन या भारत गैस का आधिकारिक मोबाइल ऐप डाउनलोड करना होगा। इसके साथ ही भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के आधार फेस आरडी ऐप की मदद से चेहरे का सत्यापन किया जा सकता है। ऐप में ई-केवाईसी विकल्प पर जाकर कैमरा चालू होने पर चेहरा स्कैन करने और पंजीकृत नंबर पर आया ओटीपी दर्ज करते ही प्रमाणीकरण पूरा हो जाता है।

बिना मोबाइल ऐप के भी उपभोक्ता माय एलपीजी पोर्टल पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। पोर्टल पर अपनी कंपनी का चयन करने के बाद बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण विकल्प में जाकर 6-अंकों का ओटीपी दर्ज करना होता है। जो ग्राहक डिजिटल माध्यम का उपयोग करने में असमर्थ हैं, वे अपने नजदीकी एलपीजी वितरक केंद्र पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बायोमेट्रिक जांच करवा सकते हैं।

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