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छत्तीसगढ़ में ई-पॉस मशीनों के किराए पर 140 करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान, सीधी खरीद से भारी अंतर

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Ms Sarah Welch / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत उचित मूल्य दुकानों में स्थापित बायोमीट्रिक ई-पॉस मशीनों के संचालन मॉडल पर सवाल खड़े हुए हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में किराए के आधार पर लगाई गई इन मशीनों के पांच वर्षीय अनुबंध पर कुल 140 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। वहीं यदि इन मशीनों को बाजार से सीधे खरीदा जाता तो पांच वर्षों के 4जी डेटा सहित यह खर्च महज 35 करोड़ रुपये के आसपास रहता। इस तरह रेंटल मॉडल अपनाने के कारण सरकारी खजाने पर लगभग 105 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने का दावा किया गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम ने प्रदेश भर की 14,085 उचित मूल्य दुकानों में ई-पॉस उपकरण लगाने, सॉफ्टवेयर संचालन, 4जी सिम कनेक्टिविटी और तकनीकी रखरखाव का जिम्मा हैदराबाद की लिंकवेल टेलीसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा है। इस पांच वर्षीय अनुबंध के लिए कंपनी ने 2 करोड़ 11 लाख 53 हजार 591 रुपये की बैंक गारंटी जमा की थी। अनुबंध की शर्तों के तहत प्रति मशीन मासिक किराया 1,214 रुपये निर्धारित किया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, बीते चार वर्षों में संबंधित कंपनी को 91.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है और पांचवां वर्ष पूरा होने पर यह राशि 140 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगी। वहीं ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध वीए-21 मॉडल की 4जी बायोमीट्रिक मशीनों की थोक दर 13 हजार से 15 हजार रुपये प्रति इकाई है। इसके आधार पर 14,085 मशीनों की एकमुश्त खरीद पर 21.12 करोड़ रुपये और पांच साल के 4जी डेटा पर 13.35 करोड़ रुपये ही व्यय होते।

इतने बड़े वित्तीय आवंटन के बावजूद धरातल पर तकनीकी खामियों की भरमार है। वर्ष 2022 से अब तक मशीन बंद होने, सर्वर डाउन रहने और बायोमीट्रिक रीडर के काम न करने की 84 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं। रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, महासमुंद, सूरजपुर, कोंडागांव, जांजगीर-चांपा और बेमेतरा जैसे ज़िलों में प्रतिवर्ष औसतन एक हजार से अधिक तकनीकी शिकायतें सामने आईं। इन तमाम गड़बड़ियों के बाद भी वर्ष 2024 में एजेंसी पर पेनल्टी के रूप में केवल 27,218 रुपये की कटौती की गई।

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