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छत्तीसगढ़ में कोचिंग संस्थानों के नियमन हेतु विधेयक का प्रारूप सार्वजनिक, सात दिनों में माँगे सुझाव

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: upload.wikimedia.org

छत्तीसगढ़ शासन ने निजी कोचिंग संस्थानों की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए एक नए कानून की रूपरेखा सार्वजनिक की है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए छत्तीसगढ़ कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक-2026 के प्रारूप पर आम नागरिकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षाविदों से सात दिनों के भीतर अभिमत और सुझाव माँगे गए हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस मसौडे को विभागीय पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इच्छुक व्यक्ति अपने सुझाव और आपत्तियाँ ईमेल पते che-higheredu.cg@gov.in पर प्रेषित कर सकते हैं।

विधेयक के प्रावधानों के तहत ऐसे सभी कोचिंग संस्थानों को औपचारिक पंजीकरण कराना होगा, जहाँ बीस अथवा उससे अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। यह पंजीयन पाँच वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा। नए नियमों के अंतर्गत संस्थानों को अपनी पाठ्यक्रम संरचना और शुल्क विवरण को पूरी तरह पारदर्शी रखना पड़ेगा। किसी छात्र द्वारा बीच में पढ़ाई छोड़ने की स्थिति में नियमानुसार आनुपातिक रूप से शुल्क लौटाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर नियमित परामर्श, चौबीसों घंटे संचालित होने वाली हेल्पलाइन और उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों के निपटारे हेतु तंत्र स्थापित करने की शर्त भी प्रस्तावित की गई है।

संस्थानों से संबद्ध छात्रावासों में भी विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था को कानूनी जवाबदेही के अंतर्गत शामिल किया गया है। प्रशासनिक निगरानी के लिए द्वि-स्तरीय व्यवस्था तैयार की जा रही है। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अगुवाई में एक प्राधिकरण गठित होगा, जबकि ज़िलों में ज़िला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समितियाँ निगरानी करेंगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों पर दस हज़ार रुपये से लेकर पाँच लाख रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकेगा। इसके अलावा गंभीर मामलों में पंजीकरण निरस्त करने का अधिकार भी प्रस्तावित है।

केंद्र सरकार ने जनवरी 2024 में कोचिंग संस्थानों के संचालन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर राज्यों से कानून बनाने को कहा था। अधिकारियों के अनुसार, बिहार, उत्तर प्रदेश, गोवा, कर्नाटक और मणिपुर जैसे राज्यों में पहले से नियम लागू हैं, जबकि राजस्थान, हरियाणा, असम और झारखंड में अलग अधिनियम बने हैं। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, आम जनता से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद इस विधेयक को अंतिम रूप देकर आगामी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

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