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वनाधिकार और पेसा कानून के क्रियान्वयन पर गठित टास्क फोर्स की पहली बैठक आयोजित

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Harminder Singh Saini / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ में वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित टास्क फोर्स की पहली औपचारिक बैठक आयोजित की गई है। जनसंपर्क विभाग के अनुसार, यह बैठक मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में संपन्न हुई है।

राज्य शासन के वन विभाग का दावा है कि वह पारदर्शी, वैज्ञानिक और समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ वनाधिकारों के क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही रायपुर में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्राप्त ग्राम सभाओं के लिए आजीविका संवर्धन से संबंधित दो दिवसीय कार्यशाला भी आयोजित की जा चुकी है।

दूसरी तरफ, राज्य में सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों के क्रियान्वयन और नोडल विभाग की जिम्मेदारी को लेकर विवाद की स्थिति रही है। सामाजिक संगठन ‘छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन’ ने वन विभाग को नोडल विभाग का दायित्व सौंपे जाने के आदेश का कड़ा विरोध किया है। संगठन का कहना है कि वनाधिकार मान्यता कानून के तहत इसके क्रियान्वयन की प्राथमिक वैधानिक जिम्मेदारी आदिवासी विकास विभाग की होनी चाहिए।

संगठन का आरोप है कि वन विभाग द्वारा प्रबंधन प्रक्रियाओं और ग्राम सभाओं की कार्ययोजनाओं पर नियंत्रण स्थापित करने के प्रयास कानून की मूल भावना के विपरीत हैं। संगठन ने मांग की है कि ग्राम सभाओं और उनकी समितियों द्वारा तैयार योजनाओं को मान्यता दी जाए और आदिवासी विकास विभाग को ही नोडल एजेंसी बनाए रखा जाए।

टास्क फोर्स के गठन और इस पहली बैठक के बाद अब यह देखना होगा कि ग्राम सभाओं के अधिकारों और नोडल विभाग के चयन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच राज्य में कानूनी प्रावधानों का मैदानी अमल किस तरह आगे बढ़ता है।

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