योजनारायपुर

श्रमिक ई-केवाईसी में छत्तीसगढ़ बड़े राज्यों में आगे, 73 लाख से अधिक सत्यापन दर्ज

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: amarujala.com

छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार के वीबी-जी राम जी कार्यक्रम के तहत पंजीकृत श्रमिकों में से 73 लाख से अधिक का डिजिटल सत्यापन दर्ज किया गया है। केंद्र सरकार की 3 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अकुशल श्रेणी के पंजीकृत कामगारों के ई-केवाईसी सत्यापन का स्तर 91.37 प्रतिशत पहुँच गया है। इस उपलब्धि के साथ छत्तीसगढ़ देश के बड़े राज्यों में सबसे आगे है। वहीं कुशल तथा अर्द्धकुशल कामगारों के सत्यापन में 82.28 प्रतिशत आँकड़े के साथ प्रदेश सभी राज्यों की सूची में पहले पायदान पर दर्ज हुआ है।

शासकीय आँकड़ों के मुताबिक, राज्य में अकुशल वर्ग के कुल 79 लाख 23 हजार 503 कामगार दर्ज हैं। इनमें से 76 लाख 20 हजार 979 कामगारों का आधार कार्ड विवरण जोड़ा जा चुका है, जबकि 72 लाख 39 हजार 364 श्रमिकों का ई-केवाईसी सत्यापन पूरा हो गया है। राष्ट्रीय स्तर पर इस श्रेणी का औसत 61.01 प्रतिशत है, जिसके मुकाबले छत्तीसगढ़ की प्रगति 30.36 प्रतिशत अंक ज्यादा है। समग्र सूची में लद्दाख, मिजोरम और त्रिपुरा के बाद राज्य चौथे क्रम पर है, लेकिन बड़े राज्यों में यह पश्चिम बंगाल के 89.10 प्रतिशत, तमिलनाडु के 83.17 प्रतिशत और मध्यप्रदेश के 63.78 प्रतिशत से आगे है।

कुशल और अर्द्धकुशल वर्ग में दर्ज 77 हजार 891 श्रमिकों में से 73 हजार 596 का आधार विवरण दर्ज हुआ है और 64 हजार 87 कामगारों की ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी की गई है। इस वर्ग का राष्ट्रीय औसत 13.53 प्रतिशत है, जिससे राज्य 68.75 प्रतिशत अंक आगे चल रहा है। केंद्रशासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव के 98.33 प्रतिशत के बाद संयुक्त सूची में प्रदेश दूसरे स्थान पर है, किंतु पूर्ण राज्यों में यह शीर्ष पर है। तुलनात्मक रूप से इस वर्ग में महाराष्ट्र 56.70 प्रतिशत और मध्यप्रदेश 16.47 प्रतिशत पर हैं।

अधिकारियों के अनुसार, ई-केवाईसी प्रक्रिया में श्रमिक के आधार और पंजीयन रिकॉर्ड का मिलान किया जाता है। कार्यस्थलों पर उपस्थिति की प्रामाणिकता परखने के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत रोजगार सहायक मास्टर रोल के आधार पर मोबाइल से दिन में दो बार चेहरे की पहचान कर हाजिरी दर्ज करते हैं। इससे फर्जी नामों पर उपस्थिति दर्ज होने की गुंजाइश सीमित होती है। बस्तर और सरगुजा जैसे सीमित नेटवर्क वाले क्षेत्रों में विशेष शिविरों के जरिए यह प्रक्रिया पूरी कराई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में अब भी करीब 7 लाख श्रमिकों का सत्यापन शेष है।

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