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छत्तीसगढ़: धान के बदले पेड़ लगाने पर किसानों को सालाना 10 हजार रुपये प्रति एकड़ सहायता देने की योजना

प्रतीकात्मक तस्वीर · फ़ोटो: Jsuhzjakauajjaiqja / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

छत्तीसगढ़ में कृषि भूमि पर हरियाली के विस्तार और काश्तकारों की आय बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना शुरू की गई थी। रायपुर में आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम के जरिए आरंभ की गई इस योजना को राजीव गांधी किसान न्याय योजना से भी संबद्ध किया गया था। शासकीय विवरण के अनुसार, खरीफ सत्र 2020 में धान की उपज लेने वाले जो कृषक धान के स्थान पर अपने खेतों में वृक्षारोपण का विकल्प चुनते हैं, उन्हें आगामी तीन वर्षों तक प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की दर से प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराने का नियम बनाया गया।

योजना के क्रियान्वयन के लिए वन विभाग ने 99 लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था, जबकि आम नागरिकों के बीच वितरण के लिए 2 करोड़ 27 लाख पौधे तैयार किए गए थे। कार्यक्रम की रूपरेखा में शासन ने दावा किया था कि फलदार प्रजातियों के रोपण से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के कुपोषण में कमी आएगी, घरों में ताजे फल उपलब्ध होंगे तथा इमारती लकड़ी के वृक्ष किसानों की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिति को मजबूती देंगे।

योजना के प्रशासनिक ढांचे में स्थानीय निकायों और समितियों को भी आर्थिक लाभ से जोड़ा गया था। दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यदि ग्राम पंचायतें अपने उपलब्ध वित्तीय संसाधनों से पौधारोपण करती हैं, तो उन्हें एक वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन अनुदान दिया जाएगा। इसी प्रकार, राजस्व विभाग के स्वामित्व वाली भूमि पर व्यावसायिक स्तर पर वृक्षारोपण करने वाली संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को भी इसी दर पर राशि हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया था।

पेड़ों की कटाई और काष्ठ विक्रय की प्रक्रियाओं को लेकर भी शासन ने स्थिति स्पष्ट की थी। नियमों के तहत, किसानों को अपने निजी खेतों में रोपे गए वृक्षों को काटने के लिए भविष्य में किसी भी सरकारी महकमे से पूर्वानुमति लेने की बाध्यता समाप्त कर दी गई। वहीं, वाणिज्यिक उपयोग हेतु समितियों द्वारा लगाए गए पेड़ों को काटने तथा उनकी उपज को खुले बाजार में बेचने का पूर्ण विधिक अधिकार संबंधित समिति को ही सौंपा गया था।

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