बस्तर में 15 नवंबर से धान खरीदी, सीमावर्ती सात जांच चौकियों पर तैनात रहेंगे संयुक्त दल

बस्तर ज़िले में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की प्रक्रिया 15 नवंबर से आरंभ होगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह खरीदी अभियान 15 जनवरी 2027 तक जारी रहेगा। स्थानीय पंजीकृत किसानों को उनकी उपज का उचित लाभ दिलाने और व्यवस्था को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए ज़िला प्रशासन ने सीमावर्ती क्षेत्रों में कड़े सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं।
पड़ोसी राज्यों से अनाधिकृत तौर पर आने वाले धान के परिवहन को थामने के उद्देश्य से बस्तर के सात सीमावर्ती नाकों को निगरानी केंद्र बनाया गया है। प्रशासन ने इस कार्य के लिए धनपुंजी, भेजापदर, नलपावण्ड, तारापुर, पोटियावण्ड, कोलावल और बदलावण्ड की सीमाओं को चिह्नित किया है। इन जांच चौकियों पर चौबीसों घंटे सतत पड़ताल सुनिश्चित करने के लिए कर्मियों को तीन अलग-अलग पालियों में जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशों के तहत पहली पाली प्रातः 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक संचालित होगी। दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से रात्रि 10 बजे तक और तीसरी पाली रात्रि 10 बजे से अगले दिन प्रातः 6 बजे तक कार्य करेगी। इन सभी केंद्रों पर राजस्व विभाग, मंडी प्रशासन, वन अमले, पंचायत सचिवों, पटवारियों तथा नगर सैनिकों के संयुक्त उड़नदस्ते मौजूद रहेंगे। जांच दल सीमाओं से गुजरने वाली हर मालवाहक गाड़ी की सघन तलाशी लेंगे और आवाजाही से संबंधित समस्त विवरण निर्धारित पंजी में दर्ज करेंगे।
प्रशासनिक आदेश के मुताबिक नवंबर 2026 से 30 अप्रैल 2027 के मध्य दूसरे प्रांतों से धान लाने पर रोक संबंधी नियम लागू रहेंगे। इस अवधि में अन्य राज्यों से धान का परिवहन करने के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के संचालक से अग्रिम अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यदि लाया जाने वाला धान 3300 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक दर का सुपर फाइन किस्म का है, तो उसके लिए पूर्व अनुमति के स्थान पर ज़िला खाद्य नियंत्रक को पहले से सूचना देनी होगी।
अधिकारियों के अनुसार इन सख्त पाबंदियों से बिचौलियों द्वारा स्थानीय उपार्जन केंद्रों में बाहरी धान खपाने की गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगेगी। नाकों पर सतत पहरेदारी से खरीदी केंद्रों में केवल अधिकृत कृषक ही अपनी उपज बेच सकेंगे।