यूरोप को हथियार आपूर्ति करने में भारत तीसरे स्थान पर पहुंचा
भारत अब यूरोप को रक्षा सामग्री और हथियारों का निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। इस उपलब्धि से वैश्विक स्तर पर देश की सैन्य साख मजबूत हुई है।
भारत अब यूरोप को रक्षा सामग्री और हथियारों का निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। इस उपलब्धि से वैश्विक स्तर पर देश की सैन्य साख मजबूत हुई है।

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। शुक्रवार को बंद हुए इस निर्गम में 22 गुना से अधिक अभिदान प्राप्त हुआ।

भारत की 7.1 प्रतिशत आर्थिक विकास दर के बीच मुद्रास्फीति की स्थिति ने नया मोड़ ला दिया है। इसके चलते वित्तीय व्यवस्था पर असर देखने को मिल रहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने मुख्य नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की योजना को अभी टाल दिया है। केंद्रीय बैंक के इस कदम से दरों में कमी के लिए अभी प्रतीक्षा करनी होगी।

एसबीआई रिसर्च के अनुसार लगातार बढ़ती महंगाई और कच्चे तेल के ऊंचे दामों के कारण रिज़र्व बैंक आगामी दिसंबर में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।
सॉफ्टवेयर क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों ने पिछले एक वर्ष के दौरान 24,000 नौकरियों में कटौती की है। इस कमी से तकनीकी क्षेत्र में रोज़गार के अवसरों पर असर पड़ा है।

सरकार ने कैंसर के उपचार में प्रयुक्त होने वाली 137 दवाओं के ट्रेड मार्जिन की सीमा 30 प्रतिशत निर्धारित की है। इस व्यवस्था के अंतर्गत इन विशिष्ट दवाओं पर मिलने वाले मुनाफे को नियंत्रित किया गया है।
भारत तक माल पहुंचाने की लागत में 130 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इस इजाफे से देश में आयातित वस्तुओं के परिवहन पर होने वाला खर्च काफी बढ़ गया है।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू हो गया है। इससे कपड़ा और चमड़ा जैसे क्षेत्रों में 10 प्रतिशत तक का शुल्क समाप्त होगा।

सर्जियो गोर के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत बेहद तेज गति से आगे बढ़ रही है।
चीन की ओर से निर्यात पर लगाई जाने वाली नई पाबंदियों के कारण भारत की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर गहरा असर पड़ने की संभावना जताई गई है।

व्यापार समझौते की अड़चनों को दूर करने के सिलसिले में पूर्व अमेरिकी वार्ताकार ने अपनी राय रखी है।

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित अत्यधिक शुल्कों के बीच भारत किसी भी तरह के आर्थिक झटके से बचने में सफल रहा है। व्यापारिक प्राथमिकताओं के चलते देश पर शून्य प्रतिशत शुल्क का प्रभाव देखने को मिला।

नेक्स्ट-जेन जीएसटी को दोहरे उद्देश्यों के साथ तैयार किया गया है। इसके तहत कर की दरों में कमी लाने और कर अनुपालन की प्रक्रिया को पहले से अधिक आसान बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने क्लोजिंग ऑक्शन और डेरिवेटिव्स सेटलमेंट के नियमों में संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत अब प्रतिदिन 10 मिनट का विशेष ऑक्शन सत्र आयोजित होगा।

मानसून की कमजोर बारिश और घटते भूजल स्तर के कारण खरीफ फसलों के रकबे में गिरावट दर्ज की गई है। इस स्थिति से किसानों के साथ-साथ विद्युत कंपनियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत और अमेरिका के मध्य व्यापारिक समझौते को लेकर जारी बातचीत काफी तेज़ गति से आगे बढ़ रही है। सर्जियो गोर ने इस वार्ता की प्रगति को लेकर जानकारी साझा की है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर पूर्व अमेरिकी वार्ताकार ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। मोदी और ट्रम्प की बैठक से लंबित अड़चनें सुलझने की संभावना जताई गई है।
भारत ने मॉरीशस के माध्यम से आने वाले निवेश से जुड़े कर नियमों में सख्ती की है। इस कदम से संबंधित कराधान व्यवस्था को पहले से अधिक कड़ा किया गया है।

सितंबर महीने में ईंधन और बिजली वर्ग की थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 25.85 प्रतिशत दर्ज की गई है।

भारत और अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के जरिए मतभेदों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं। वर्ष 2025 की शुरुआत से जारी इस वार्ता का मकसद शुल्क विवादों को खत्म कर बाजार पहुंच को बढ़ावा देना है।
विदेश मंत्री के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। दोनों देश इस समझौते के बेहद करीब पहुंच रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने वैश्विक मंदी के माहौल में भारत की आर्थिक प्रगति पर सकारात्मक रुख व्यक्त किया है। संस्थान के अनुसार दुनिया भर में जारी दबाव के बीच देश बेहतर स्थिति में बना हुआ है।

वित्त मंत्री द्वारा रुपये की स्थिति और एलटीसीजी से जुड़े दो प्रमुख बिंदुओं को सामने रखे जाने के बाद वित्तीय माहौल में बदलाव देखा गया है।

आईएमएफ ने मजबूत एआई निवेश के दम पर 2026 के लिए वैश्विक विकास दर अनुमान को बढ़ाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि मध्य पूर्व में तनाव और कर्ज के बढ़ते बोझ को आर्थिक वृद्धि के लिए जोखिम बताया गया है।
आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री सिल्वाना तेनरेयरो के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मांग ने भारत और चीन के व्यापार को रफ्तार दी है। उन्होंने बढ़ते कर्ज पर चिंता जताते हुए वित्तीय घाटा कम करने की सलाह दी।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार भारत वर्ष 2026 और 2027 में 7 प्रतिशत विकास दर के साथ विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। एजेंसी ने वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाया है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ते कर्ज और वित्तीय घाटे पर चिंता जताई है। संस्था ने वर्ष 2026 में वैश्विक विकास दर 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने मौजूदा वर्ष के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया है। तेल की कीमतों में उछाल से वर्ष 2026 में विश्वभर में मुद्रास्फीति 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत की विकास दर दोनों वित्त वर्षों में सात प्रतिशत रहने की संभावना जताई है। वहीं वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता की चेतावनी भी दी गई है।